आई है खेलन के फाग लला सों
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| राग | आसावरी |
| विधा | धमार (विधा) |
| ताल | धमार (ताल) · 14 मात्राएँ |
| लय | विलंबित |
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | आई है खेलन के फाग लला सों | Aai hai khelan ke phaag lala son | वह लला के साथ फाग खेलने आई है। |
| स्थायी | हम सों छिपावत कहा जियठानी | Ham son chhipaavat kaha jiyathaani | जियठानी, मुझसे क्या छिपाती हो? |
| अंतरा | हों तो तिहारि प्यारी | Hon to tihaari pyaari | मैं तो तुम्हारी प्यारी हूँ। |
| अंतरा | सखी हित जानत है | Sakhi hit jaanat hai | सखी तुम्हारा हित जानती है, |
| अंतरा | तेरी ननद जेठानी | Teri nanad jethaani | तुम्हारी ननद और जेठानी। |
शब्दार्थ
फाग वसंत और होली से जुड़ा रंगों का खेल है। लला बालक या प्रिय युवक के लिए स्नेहपूर्ण संबोधन है। ननद पति की बहन है और जियठानी या जेठानी पति के बड़े भाई की पत्नी को कहता है।