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कान्हा मोहे आसावरी राग सुनाये

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग आसावरी
विधा लक्षण गीत
ताल तीनताल · 16 मात्राएँ
लय मध्य

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी कान्हा मोहे आसावरी राग सुनाये Kanha mohe Asavari raag sunaaye कान्हा मुझे आसावरी राग सुनाते हैं।
स्थायी ग नि को आरोहन में छुपाये Ga ni ko aarohan men chhupaaye आरोह में ग और नि को छिपाते हैं।
अंतरा धैवत वादी गा समवादी Dhaivat vaadi ga samvaadi धैवत वादी है और गा समवादी।
अंतरा मध्यम सुर ग्रह न्यास सु पंचम Madhyam sur grah nyaas su pancham मध्यम ग्रह स्वर है और पंचम न्यास स्वर।
अंतरा अवरोहन सं पूरन दिखावत Avrohan san puran dikhaavat अवरोह में स्वरों की पूर्णता दिखाते हैं।

शब्दार्थ

आरोहन चढ़ते हुए और अवरोहन उतरते हुए स्वर-क्रम को कहते हैं। ग्रह आरंभ का स्वर है और न्यास वह स्वर जहाँ वाक्य ठहरता है। वादी और समवादी प्रधान तथा सहचर स्वर की पहचान देते हैं।

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