लाल अलमाने हो तुम रैन के जागे
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | लाल अलमाने हो तुम रैन के जागे | Laal alamaane ho tum rain ke jaage | प्रिय, ‘अलमाने’; तुम रात भर जागे हो। |
| स्थायी | नैन उनींदे अति रत रती रस पागे | Nain uninde ati rat rati ras paage | तुम्हारे नयन उनींदे हैं, प्रेम के रस में गहरे डूबे हैं। |
| अंतरा | अंजन अधर भाल कवन तिय अनुरागे | Anjan adhar bhaal kavan tiya anuraage | अधरों और भाल पर अंजन है—किस स्त्री से तुम्हारा अनुराग है? |
| अंतरा | सांचि कहो हररंग काके मुख हंस लागे | Saanchi kaho Harrang kaake mukh hans laage | हररंग, सच कहो: ‘काके मुख हंस लागे’। |
शब्दार्थ
रैन रात है और उनींदे जागने के बाद नींद से भरे नयनों को कहता है। अंजन काजल है; अधर होंठ और भाल माथा है। अनुराग प्रेम का लगाव है, जिससे प्रश्नों में निकटता और उलाहने का भाव आता है।