Beta (under development)

लाल अलमाने हो तुम रैन के जागे

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग आसावरी
विधा ख़याल
ताल झपताल · 10 मात्राएँ
लय मध्य

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी लाल अलमाने हो तुम रैन के जागे Laal alamaane ho tum rain ke jaage प्रिय, ‘अलमाने’; तुम रात भर जागे हो।
स्थायी नैन उनींदे अति रत रती रस पागे Nain uninde ati rat rati ras paage तुम्हारे नयन उनींदे हैं, प्रेम के रस में गहरे डूबे हैं।
अंतरा अंजन अधर भाल कवन तिय अनुरागे Anjan adhar bhaal kavan tiya anuraage अधरों और भाल पर अंजन है—किस स्त्री से तुम्हारा अनुराग है?
अंतरा सांचि कहो हररंग काके मुख हंस लागे Saanchi kaho Harrang kaake mukh hans laage हररंग, सच कहो: ‘काके मुख हंस लागे’।

शब्दार्थ

रैन रात है और उनींदे जागने के बाद नींद से भरे नयनों को कहता है। अंजन काजल है; अधर होंठ और भाल माथा है। अनुराग प्रेम का लगाव है, जिससे प्रश्नों में निकटता और उलाहने का भाव आता है।

Help us improve this page

Submit new content, corrections and improvement suggestions.

Page: /hi/hindustani/compositions/asavari-laal-alamaane-ho-tum-rain-ke