Beta (under development)

राम जै जै मनभावन

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग आसावरी
विधा ख़याल
ताल झूमरा · 14 मात्राएँ
लय विलंबित

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी राम जै जै मनभावन Ram jai jai manbhaavan मनभावन राम की जय-जय।
स्थायी नमो नारायण एकन के किये सब कार Namo Narayan ekan ke kiye sab kaar नारायण को नमन, जो अकेले ही सब कार्य करते हैं।
स्थायी हम ग्वारनि तुम ग्वार गुसांईं Ham gvaarani tum gvaar gusaain हम ग्वालिनें हैं; तुम ग्वालों के स्वामी।
स्थायी जनम जनम के रखवार हमार Janam janam ke rakhvaar hamaar जन्म-जन्म के हमारे रखवाले।

शब्दार्थ

जै जै स्तुति का दोहराया हुआ जयकार है और मनभावन मन को प्रिय लगने वाले को कहता है। नमो आदर से नमन करने का शब्द है। जनम जनम में अनेक जन्मों तक का भाव है और रखवार रक्षा करने वाला है।

Help us improve this page

Submit new content, corrections and improvement suggestions.

Page: /hi/hindustani/compositions/asavari-ram-jai-jai-manbhaavan