पिया मिलन कों बारी अरि
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | पिया मिलन कों बारी अरि | Piya milan kon baari ari | सखी, मैं बाला अपने प्रिय से मिलना चाहती हूँ। |
| स्थायी | एरि सखी जतन कछु बता | Eri sakhi jatan kachhu bata | सखी, कोई उपाय बता। |
| स्थायी | मैं तोरी बलिहारी वारि | Main tori balihaari vaari | मैं तुम्हारी हूँ; मैं अपने को तुम पर न्योछावर करती हूँ। |
| अंतरा | बहुत दिनन पाछे पिया मोरे आये | Bahut dinan paachhe piya more aaye | बहुत दिनों बाद मेरे प्रिय आए हैं। |
| अंतरा | मंगल गावो सखियां सारि | Mangal gaavo sakhiyaan saari | सब सखियो, मंगल गीत गाओ। |
शब्दार्थ
अरि और एरि सखी के संबोधन हैं। बारी का अर्थ बाला या युवती है। जतन उपाय को कहता है और बलिहारी वारि स्नेह से अपने को अर्पित करने का भाव है। मंगल गावो में प्रिय के आगमन पर सखियों को उत्सव के गीत गाने का निमंत्रण है।