प्रभु दाता सबन के
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | प्रभु दाता सबन के | Prabhu daata saban ke | प्रभु सबको देने वाले हैं। |
| स्थायी | तू रट रे मन घरि पल छिन | Tu rat re man ghari pal chhin | हे मन, हर घड़ी, पल और छिन प्रभु का नाम रट। |
| अंतरा | जो तू चाहे दूध पूत अन धन लछमि | Jo tu chaahe dudh put an dhan lachhami | यदि तू दूध, संतान, अन्न, धन और समृद्धि चाहता है, |
| अंतरा | इमान वाको नाम लेवा के रब को नाम ले | Imaan vaako naam leva ke rab ko naam le | ‘इमान वाको नाम लेवा के’; रब का नाम ले। |
शब्दार्थ
दाता देने वाले हैं और सबन के में सबके प्रति उनका दानभाव है। घरि, पल और छिन थोड़े-थोड़े समय को जोड़कर निरंतर स्मरण की बात कहते हैं। दूध पूत में पोषण और संतान का तथा अन धन में अन्न और धन का भाव है।