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प्रभु दाता सबन के

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग भैरव
विधा ख़याल
ताल तीनताल · 16 मात्राएँ
लय मध्य

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी प्रभु दाता सबन के Prabhu daata saban ke प्रभु सबको देने वाले हैं।
स्थायी तू रट रे मन घरि पल छिन Tu rat re man ghari pal chhin हे मन, हर घड़ी, पल और छिन प्रभु का नाम रट।
अंतरा जो तू चाहे दूध पूत अन धन लछमि Jo tu chaahe dudh put an dhan lachhami यदि तू दूध, संतान, अन्न, धन और समृद्धि चाहता है,
अंतरा इमान वाको नाम लेवा के रब को नाम ले Imaan vaako naam leva ke rab ko naam le ‘इमान वाको नाम लेवा के’; रब का नाम ले।

शब्दार्थ

दाता देने वाले हैं और सबन के में सबके प्रति उनका दानभाव है। घरि, पल और छिन थोड़े-थोड़े समय को जोड़कर निरंतर स्मरण की बात कहते हैं। दूध पूत में पोषण और संतान का तथा अन धन में अन्न और धन का भाव है।

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