सांब सदाशिव भोला प्यारे
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | सांब सदाशिव भोला प्यारे | Samb Sadashiv Bhola pyaare | प्रिय सांब सदाशिव, भोले प्रभु, |
| स्थायी | रट मन निस दिन परम दयाघन | Rat man nis din param dayaaghan | हे मन, परम दया से भरे प्रभु का नाम रात-दिन रट। |
| स्थायी | तज माया को झकोला | Taj maaya ko jhakola | माया के झकोले को छोड़ दे। |
| अंतरा | काम क्रोध मद मोह रु मत्सर | Kaam krodh mad moh ru matsar | काम, क्रोध, मद, मोह और मत्सर, |
| अंतरा | लोभ कहत खट रिपु हत पामर | Lobh kahat khat ripu hat paamar | लोभ सहित इन्हें छह शत्रु कहते हैं; अरे मूर्ख, इन्हें नष्ट कर। |
| अंतरा | छांड भरम शरन जाय चतुर | Chhaand bharam sharan jaay Chatur | चतुर, भ्रम छोड़कर शरण में जा। |
शब्दार्थ
दयाघन प्रभु के दया से भरे होने का भाव देता है और माया को झकोला भ्रम के थपेड़ों में पड़ने को कहता है। काम, क्रोध, मद, मोह, मत्सर और लोभ यहाँ मन के छह शत्रु हैं। शरन वह आश्रय है जिसकी ओर भ्रम छोड़कर जाने को कहा गया है।