तू अब याद कर रे बंदे अपने अल्ला को
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | तू अब याद कर रे बंदे अपने अल्ला को | Tu ab yaad kar re bande apne Allah ko | बंदे, अब अपने अल्ला को याद कर। |
| स्थायी | जो कुछ भला होवे तेरो | Jo kuchh bhala hove tero | जिससे तेरा कुछ भला हो। |
| अंतरा | लाइ लाहि इल्लिल्ला मुहंमद रसूलिल्ला | Laai laahi illilla Muhammad rasulilla | अल्लाह के सिवा कोई ईश्वर नहीं; मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं। |
| अंतरा | नबी जी का कलमा जबां पर धर रे | Nabi ji ka kalma jabaan par dhar re | नबी जी का कलमा अपनी ज़बान पर रख। |
शब्दार्थ
बंदे ईश्वर के सेवक को संबोधित करता है। कलमा आस्था की घोषणा है और जबां जीभ या वाणी को कहता है। याद कर स्मरण करने का आह्वान है।