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तू अब याद कर रे बंदे अपने अल्ला को

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग भैरव
विधा ख़याल
ताल झपताल · 10 मात्राएँ
लय मध्य

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी तू अब याद कर रे बंदे अपने अल्ला को Tu ab yaad kar re bande apne Allah ko बंदे, अब अपने अल्ला को याद कर।
स्थायी जो कुछ भला होवे तेरो Jo kuchh bhala hove tero जिससे तेरा कुछ भला हो।
अंतरा लाइ लाहि इल्लिल्ला मुहंमद रसूलिल्ला Laai laahi illilla Muhammad rasulilla अल्लाह के सिवा कोई ईश्वर नहीं; मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं।
अंतरा नबी जी का कलमा जबां पर धर रे Nabi ji ka kalma jabaan par dhar re नबी जी का कलमा अपनी ज़बान पर रख।

शब्दार्थ

बंदे ईश्वर के सेवक को संबोधित करता है। कलमा आस्था की घोषणा है और जबां जीभ या वाणी को कहता है। याद कर स्मरण करने का आह्वान है।

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