बाबुल मोरा नैयर छूटो जाय
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| राग | भैरवी |
| विधा | ठुमरी |
| ताल | पंजाबी तीनताल · 16 मात्राएँ |
| लय | विलंबित |
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | बाबुल मोरा नैयर छूटो जाय | Baabul mora naiyar chhuto jaay | बाबुल, मेरा मायका छूटता जा रहा है। |
| अंतरा | चार कहार मिल डुलियां मगावो | Chaar kahaar mil duliyaan magaavo | चार कहार मिलें; डोली मँगवाओ। |
| अंतरा | अपना बिगाना छूटो जाये | Apna bigaana chhuto jaaye | अपने और पराए छूटते जा रहे हैं। |
| अंतरा | बाबुल मोरा नैयर छूटो जाय | Baabul mora naiyar chhuto jaay | बाबुल, मेरा मायका छूटता जा रहा है। |
शब्दार्थ
बाबुल पिता के लिए स्नेहपूर्ण संबोधन है। कहार डोली उठाने वाले होते हैं। अपना और बिगाना में अपने लोगों तथा परायों का भेद है। नैयर मायके को कहता है और डुलियां मगावो में डोली मँगवाने का आग्रह है।