भवानी दयानी महा बाक बानी
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | भवानी दयानी महा बाक बानी | Bhavani dayaani maha baak baani | दयामयी भवानी; ‘महा बाक बानी’। |
| स्थायी | सुर नर मुनि जन मानि सकल बुध ग्यानी | Sur nar muni jan maani sakal budh gyaani | देवता, मनुष्य, मुनि और सभी बुद्धिमान ज्ञानी तुम्हें मानते हैं। |
| अंतरा | जग जननि जग जानि महिषासुर मरदनि | Jag janani jag jaani Mahishasur maradani | जगत की जननी, जगत में विख्यात, महिषासुर का मर्दन करने वाली। |
| अंतरा | ज्वाला मुखी चंडि अमर पद दानी | Jwala Mukhi Chandi amar pad daani | ज्वाला मुखी, चंडि, अमर पद देने वाली। |
शब्दार्थ
जननि देवी को जगत की माता कहकर संबोधित करता है। मरदनि महिषासुर को परास्त करने या मर्दन करने का भाव है। अमर पद आशीष के रूप में मिलने वाली अमर अवस्था है, कोई सांसारिक पद या प्रतिष्ठा नहीं।