बिना रे खिवैया नैया कैसे लागे पार
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| राग | भैरवी |
| विधा | ठुमरी |
| ताल | पंजाबी तीनताल · 16 मात्राएँ |
| लय | विलंबित |
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | बिना रे खिवैया नैया कैसे लागे पार | Bina re khivaiya naiya kaise laage paar | खिवैया के बिना नैया कैसे पार लगे? |
| स्थायी | ना रे खिवैया नैया कैसे लागे पार | Na re khivaiya naiya kaise laage paar | खिवैया के बिना नैया कैसे पार लगे? |
| अंतरा | नदिया गहरी नाव पुरानी | Nadiya gahri naav puraani | नदी गहरी है, नाव पुरानी। |
| अंतरा | मौंला लगावे बेड़ा पार | Maula lagaave bera paar | मौंला बेड़े को पार लगाएँ। |
| अंतरा | नैया कैसे लागे पार | Naiya kaise laage paar | नैया कैसे पार लगे? |
शब्दार्थ
खिवैया नाव चलाने वाला है और नैया या नाव जल में चलने की सवारी है। पार दूसरा किनारा या सकुशल पार पहुँचने को कहता है। गहरी नदी और पुरानी नाव पार पहुँचाने की पुकार को तीव्र बनाती हैं।