डारत केसर पिचकारि
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| राग | भैरवी |
| विधा | धमार (विधा) |
| ताल | धमार (ताल) · 14 मात्राएँ |
| लय | विलंबित |
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | डारत केसर पिचकारि | Daarat kesar pichkaari | केसर का रंग पिचकारी से डालते हैं, |
| स्थायी | सखि मो पै कुंवर कन्हैया | Sakhi mo pai kunvar Kanhaiya | सखि, कुँवर कन्हैया मुझ पर डालते हैं। |
| अंतरा | बाट घाट में | Baat ghaat men | बाट और घाट में, |
| अंतरा | रोकत रूंधत | Rokat rundhat | वे रोकते और घेरते हैं। |
| अंतरा | कहा करूं मोंरि दैया | Kaha karun monri daiya | क्या करूँ, मेरी दैया? |
शब्दार्थ
केसर एक सुगंधित रंगद्रव्य है और पिचकारि रंगीन पानी छोड़ने का साधन है। कुंवर युवा राजकुमार का संबोधन है। बाट और घाट राह तथा जल के किनारे के स्थान को बताते हैं।