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धन घरी धन सुदिन

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग भैरवी
विधा ख़याल
ताल झपताल · 10 मात्राएँ
लय मध्य

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी धन घरी धन सुदिन Dhan ghari dhan sudin धन्य यह घड़ी, धन्य यह शुभ दिन।
स्थायी धन धन मुहूरत Dhan dhan muhurat धन्य-धन्य है मुहूरत।
स्थायी धन धन सखी धन आज की बेंलि Dhan dhan sakhi dhan aaj ki benli धन्य-धन्य, सखी, धन्य आज की शुभ बेला।
अंतरा धन धन बिंद्रावन Dhan dhan Bindravan धन्य-धन्य है बिंद्रावन।
अंतरा धन बंसि बट धन Dhan bansi bat dhan धन्य है बंसिबट, धन्य।
अंतरा धन सरित सिरि जमुना Dhan sarit siri Jamuna धन्य है श्री जमुना नदी।
अंतरा कान्हु करत केलि Kanhu karat keli कान्हु क्रीड़ा करते हैं।

शब्दार्थ

धन आशीष या प्रशंसा का दोहराया हुआ शब्द है। सुदिन शुभ दिन है और मुहूरत शुभ समय। बंसि बाँसुरी है, बट वट-वृक्ष है, सरित नदी है और केलि क्रीड़ा को कहता है।

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