गोविंद को भजन कर ले मन रंग
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | गोविंद को भजन कर ले मन रंग | Govind ko bhajan kar le man rang | हे मन, गोविंद का भजन कर और भक्ति में रम जा। |
| अंतरा | अंतरयामी नरनारायण पूरत सब के काम | Antarayaami Nar-Narayan purat sab ke kaam | सबके हृदय की बात जानने वाले नरनारायण सभी के काम पूरे करते हैं। |
शब्दार्थ
भजन ईश्वर का गुणगान या स्मरण है। अंतरयामी हर हृदय की बात जानने वाले को कहते हैं। मन की भक्ति और सबके काम पूरे करने वाले प्रभु में विश्वास इस पुकार में साथ आते हैं।