शारदा बिद्या दानि दयानी
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | शारदा बिद्या दानि दयानी | Sharada bidya daani dayaani | शारदा, ज्ञान देने वाली दयामयी, |
| स्थायी | जग जननि दुख हरनि | Jag janani dukh harani | जगत की जननी, दुख हरने वाली, |
| स्थायी | ज्वाला मुखी मात सरस्वती | Jwala Mukhi maat Saraswati | माता ज्वाला मुखी, सरस्वती। |
| अंतरा | कीजे कृपा दृष्टि सेवक पर अपने | Kije kripa drishti sevak par apne | अपने सेवक पर कृपा की दृष्टि करो। |
| अंतरा | नारायनी सेत कमलासनी सेत | Narayani set Kamalasani set | नारायनी, श्वेत; कमलासनी, श्वेत। |
| अंतरा | सेत अखिनि सेत अश्विनि हर पार्वती | Set akhini set ashvini Har Parvati | श्वेत, ‘अखिनि’; श्वेत, ‘अश्विनि’; हर, पार्वती। |
शब्दार्थ
बिद्या ज्ञान है और जननि देवी को माता कहकर संबोधित करता है। कृपा दृष्टि केवल भौतिक फल नहीं, करुणाभरी निगाह की प्रार्थना है। सेत का अर्थ श्वेत है और कमलासनी कमल पर विराजने वाली देवी का भाव जगाता है।