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सोच मना तु कौन घट मैं

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग भैरवी
विधा भजन
ताल तीनताल · 16 मात्राएँ

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी सोच मना तु कौन घट मैं Soch mana tu kaun ghat main हे मन, विचार कर: तू किस घट में रहता है?
अंतरा कहाँ से तु आयो कहाँ जावेगो Kahaan se tu aayo kahaan jaavego तू कहाँ से आया है और कहाँ जाएगा?
अंतरा भेजा तुझको कौन घट में Bheja tujhko kaun ghat men तुझे इस घट में किसने भेजा?
अंतरा क्या तू लायो क्या ले जावेगो Kya tu laayo kya le jaavego तू क्या लाया था और क्या साथ ले जाएगा?
अंतरा मालिक सबका कौन घट मैं Maalik sabka kaun ghat main सबका मालिक किस घट में रहता है?

शब्दार्थ

घट पात्र है और यहाँ शरीर को निवास-स्थान की तरह देखने का भाव देता है। आने-जाने और साथ लाई वस्तुओं के प्रश्न मन को अपने मूल तथा अपनी सीमाओं की ओर मोड़ते हैं। मालिक सबके स्वामी का बोध कराता है।

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