जाग उठे सब जन तुम जागो
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| राग | अल्हैया बिलावल |
| विधा | ख़याल |
| ताल | तीनताल · 16 मात्राएँ |
| लय | मध्य |
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | जाग उठे सब जन तुम जागो | Jaag uthe sab jan tum jaago | सब जन जाग उठे हैं; तुम भी जागो। |
| स्थायी | गौवन के चरवाल चरैया | Gauvan ke charavaal charaiya | गायों के रखवाले और चराने वाले, |
| अंतरा | ग्वाल बाल सब गौवां चरावत | Gvaal baal sab gauvaan charaavat | सब ग्वाल-बाल गायें चरा रहे हैं। |
| अंतरा | तुमरे कारन आवत धावत | Tumare kaaran aavat dhaavat | वे तुम्हारे लिए दौड़े आते हैं। |
| अंतरा | सदारंग मन तुमसों लागो | Sadarang man tumason laago | सदारंग का मन तुमसे लगा है। |
शब्दार्थ
गौवन और गौवां गायों से जुड़े गोपालन के शब्द हैं। ग्वाल बाल छोटे ग्वाले हैं और धावत उनके दौड़कर आने की तत्परता दिखाता है। मन तुमसों लागो जगाए जा रहे प्रिय से मन का लगाव व्यक्त करता है।