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अहो जिन बोलो पिया

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग दुर्गा
विधा ख़याल
ताल तीनताल · 16 मात्राएँ
लय विलंबित

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी अहो जिन बोलो पिया Aho jin bolo piya अहो प्रिय, मत बोलो।
स्थायी मोसों तुम आजे Moson tum aaje आज मुझसे।
अंतरा जहां वसे निस वहां सिघारो Jahaan vase nis vahaan sighaaro जहाँ रात बिताई, वहीं लौट जाओ।
अंतरा काहे हमसों काजे Kaahe hamason kaaje मुझसे क्या काम है?

शब्दार्थ

मोसों और हमसों का अर्थ मुझसे या मेरे साथ है। निस रात है और पिया प्रिय का संबोधन है। अंतिम प्रश्न में दूरी का भाव है, मानो वक्ता पूछता हो कि अब प्रिय को उससे क्या काम है।

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