Beta (under development)

देवी भजो दुरगा भवानी

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग दुर्गा
विधा ख़याल
ताल तीनताल · 16 मात्राएँ
लय मध्य

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी देवी भजो दुरगा भवानी Devi bhajo Durga Bhavani देवी दुर्गा भवानी का भजन करो।
स्थायी जगत जननी महिषासुर मरदनी Jagat janani Mahishasur maradani जगत की माता, महिषासुर का मर्दन करने वाली।
अंतरा हिमनग नंदिनी भवभय खंडनि Himanag nandini bhavabhay khandani हिमपर्वत की पुत्री, संसार का भय मिटाने वाली।
अंतरा शरनगत चतुर अभय वरदानि Sharanagat Chatur abhay varadaani चतुर शरणागत हैं; देवी अभय का वरदान देती हैं।

शब्दार्थ

हिमनग नंदिनी देवी को हिमपर्वत की पुत्री कहता है। भवभय संसार से जुड़ा भय है। अभय भय से मुक्ति है, जो यहाँ शरण लेने वाले को देवी के वरदान के रूप में मिलती है।

Help us improve this page

Submit new content, corrections and improvement suggestions.

Page: /hi/hindustani/compositions/durga-devi-bhajo-durga-bhavani