Beta (under development)

काहे छेड़ो मोहे हो श्याम

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग काफ़ी
विधा ख़याल
ताल एकताल · 12 मात्राएँ
लय मध्य

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी काहे छेड़ो मोहे हो श्याम Kaahe chhero mohe ho Shyam श्याम, मुझे क्यों छेड़ते हो?
स्थायी बहुत हसि न करो तुम अब Bahut hasi na karo tum ab अब तुम इतना न हँसो।
स्थायी सास ननद सुन जो पावत तुमें Saas nanad sun jo paavat tumen सास और ननद जो तुम्हें सुन लें,
स्थायी देगी गारि श्याम Degi gaari Shyam वे तुम्हें गाली देंगी, श्याम।
अंतरा अपनि करत कछु न सुनत Apani karat kachhu na sunat अपनी ही करते हो, कुछ नहीं सुनते।
अंतरा रोकत नित डगर चलत Rokat nit dagar chalat राह चलते मुझे नित रोकते हो।
अंतरा नीलज ठडुराइ करत Nilaj thaduraai karat निर्लज्ज होकर ‘ठडुराइ’ करते हो।
अंतरा सास ननद Saas nanad सास और ननद।

शब्दार्थ

गारि गाली या फटकार के शब्द को कहता है और डगर राह है। अपनि करत में अपनी ही इच्छा से काम करने का भाव है। सास पति की माता और ननद पति की बहन है।

Help us improve this page

Submit new content, corrections and improvement suggestions.

Page: /hi/hindustani/compositions/kafi-kaahe-chhero-mohe-ho-shyam