सुंदर तेरे मुख सें गारी
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| राग | काफ़ी |
| विधा | धमार (विधा) |
| ताल | धमार (ताल) · 14 मात्राएँ |
| लय | विलंबित |
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | सुंदर तेरे मुख सें गारी | Sundar tere mukh sen gaari | तुम्हारे सुंदर मुख से निकली गाली, |
| स्थायी | मोहे प्यारी लगत है | Mohe pyaari lagat hai | मुझे प्यारी लगती है। |
| अंतरा | बेसर की मोतियन की झलक | Besar ki motiyan ki jhalak | बेसर के मोतियों की झलक, |
| अंतरा | चंदा की चमक अति सोहत न्यारी | Chanda ki chamak ati sohat nyaari | चाँद की चमक की तरह बहुत निराली शोभती है। |
शब्दार्थ
गारी उलाहना या गाली है, जिसे सुनने वाला यहाँ प्रेम के कारण प्रिय मानता है। बेसर नाक का आभूषण है और मोतियन मोतियों को कहते हैं। झलक और चमक छोटी-सी दमक से चाँद जैसी आभा तक का बिंब बनाते हैं।