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लई रे श्याम हमरी डुरिया

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग मारवा
विधा ख़याल
ताल तीनताल · 16 मात्राएँ

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी लई रे श्याम हमरी डुरिया Laee re Shyam hamari duriya श्याम, तुमने हमारी ‘डुरिया’ ले ली।
स्थायी लई रे श्याम हमरी डुरिया Laee re Shyam hamari duriya श्याम, तुमने हमारी ‘डुरिया’ ले ली।
स्थायी कैसे मैं भरूँ जल की गगरिया Kaise main bharun jal ki gagariya मैं जल की गगरी कैसे भरूँ?
अंतरा बाट घाट में रोकत टोकत Baat ghaat men rokat tokat बाट और घाट में तुम रोकते और टोकते हो।
अंतरा अब न रहों तेरि मथुरा नगरिया Ab na rahon teri Mathura nagariya अब मैं तुम्हारी मथुरा नगरी में नहीं रहूँगी।

शब्दार्थ

लई में ले लेने का भाव है। गगरिया पानी की गगरी है। बाट घाट रास्तों और पानी के किनारे के घाटों को कहता है; रोकत टोकत में रोकने और टोकने का भाव है। मथुरा नगरिया मथुरा नगरी है।

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