एरी मका सब सुख दीनो
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | एरी मका सब सुख दीनो | Eri makaa sab sukh dino | अरी सखी, उन्होंने मुझे सब सुख दिए हैं: |
| स्थायी | दूध पूत और अन धन लछमी | Dudh put aur an dhan lachhmi | दूध, संतान, अन्न, धन और समृद्धि। |
| स्थायी | पिया पायो गोबिंद रंग भीनो | Piya paayo Govind rang bhino | प्रेम-रंग में भीगे अपने प्रिय गोविंद को मैंने पाया है। |
| अंतरा | अधम उधारन जस बीस्तारन | Adham udhaaran jas bistaaran | हे पतितों का उद्धार करने वाले, यश फैलाने वाले, |
| अंतरा | कृपा करन दुख हरन सुख करन | Kripa karan dukh haran sukh karan | तुम कृपा करते हो, दुख हरते हो और सुख देते हो। |
| अंतरा | आजिज के सब लायक कीनो | Aajij ke sab laayak kino | तुमने सब कुछ आजिज के योग्य कर दिया। |
शब्दार्थ
एरी सखी का संबोधन है और मका का अर्थ ‘मुझे’ है। दूध और पूत में दूध तथा संतान का भाव है; लछमी समृद्धि को कहता है। रंग भीनो प्रेम के रंग में भीगने का भाव है। उधारन उद्धार करने को और जस यश को कहता है। अंतिम पंक्ति में आजिज भक्त-वाणी का नाम है।