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एरी मका सब सुख दीनो

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग पूर्वी
विधा भजन
ताल तीनताल · 16 मात्राएँ

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी एरी मका सब सुख दीनो Eri makaa sab sukh dino अरी सखी, उन्होंने मुझे सब सुख दिए हैं:
स्थायी दूध पूत और अन धन लछमी Dudh put aur an dhan lachhmi दूध, संतान, अन्न, धन और समृद्धि।
स्थायी पिया पायो गोबिंद रंग भीनो Piya paayo Govind rang bhino प्रेम-रंग में भीगे अपने प्रिय गोविंद को मैंने पाया है।
अंतरा अधम उधारन जस बीस्तारन Adham udhaaran jas bistaaran हे पतितों का उद्धार करने वाले, यश फैलाने वाले,
अंतरा कृपा करन दुख हरन सुख करन Kripa karan dukh haran sukh karan तुम कृपा करते हो, दुख हरते हो और सुख देते हो।
अंतरा आजिज के सब लायक कीनो Aajij ke sab laayak kino तुमने सब कुछ आजिज के योग्य कर दिया।

शब्दार्थ

एरी सखी का संबोधन है और मका का अर्थ ‘मुझे’ है। दूध और पूत में दूध तथा संतान का भाव है; लछमी समृद्धि को कहता है। रंग भीनो प्रेम के रंग में भीगने का भाव है। उधारन उद्धार करने को और जस यश को कहता है। अंतिम पंक्ति में आजिज भक्त-वाणी का नाम है।

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