नइ रे लगन मोरि लागि
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | नइ रे लगन मोरि लागि | Nai re lagan mori laagi | मुझे नया लगाव लग गया है। |
| अंतरा | तेरे रंग में निस दिन | Tere rang men nis din | तुम्हारे प्रेम में रात-दिन, |
| अंतरा | हों रहत रंग पागि | Hon rahat rang paagi | मैं उसी रंग में भीगी रहती हूँ। |
शब्दार्थ
नइ का अर्थ नया है और लगन लगाव या भक्ति को कहता है। निस दिन रात-दिन है। रंग पागि में प्रेम के रंग में भीगने का भाव है; हों वक्ता के ‘मैं’ का रूप है।