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नइ रे लगन मोरि लागि

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग पूर्वी
विधा ख़याल
ताल एकताल · 12 मात्राएँ
लय मध्य

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी नइ रे लगन मोरि लागि Nai re lagan mori laagi मुझे नया लगाव लग गया है।
अंतरा तेरे रंग में निस दिन Tere rang men nis din तुम्हारे प्रेम में रात-दिन,
अंतरा हों रहत रंग पागि Hon rahat rang paagi मैं उसी रंग में भीगी रहती हूँ।

शब्दार्थ

नइ का अर्थ नया है और लगन लगाव या भक्ति को कहता है। निस दिन रात-दिन है। रंग पागि में प्रेम के रंग में भीगने का भाव है; हों वक्ता के ‘मैं’ का रूप है।

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