रंगीली राम की अखियां
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | रंगीली राम की अखियां | Rangili Ram ki akhiyaan | राम की आँखें आनंद से भरी हैं। |
| अंतरा | सुर नर मुनि जन जीवन खंजन | Sur nar muni jan jivan khanjan | वे आँखें देवों, मनुष्यों और मुनियों का जीवन हैं, खंजन-पक्षी जैसी हैं। |
| अंतरा | मन रंजन पखियां | Man ranjan pakhiyaan | वे नन्हे पक्षी मन को आनंदित करते हैं। |
| अंतरा | कृपा कटाछ लछन छबि आछे | Kripa kataachh lachhan chhabi aachhe | उनकी कृपा-भरी तिरछी चितवन, लक्षण और छवि सुंदर हैं। |
| अंतरा | मृगछौना छकियां | Mrigchhaunaa chhakiyaan | वे हिरण के बच्चों को भी चकित करती हैं। |
शब्दार्थ
अखियां आँखें हैं। खंजन चंचल गति वाला एक पक्षी है, जिसकी उपमा चितवन से दी जाती है। मन रंजन मन को आनंदित करना है। कटाछ तिरछी चितवन है; लछन और छबि में रूप के लक्षण और सुंदरता का भाव है। मृगछौना हिरण का बच्चा है।