Beta (under development)

रंगीली राम की अखियां

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग पूर्वी
विधा भजन
ताल तीनताल · 16 मात्राएँ
लय मध्य

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी रंगीली राम की अखियां Rangili Ram ki akhiyaan राम की आँखें आनंद से भरी हैं।
अंतरा सुर नर मुनि जन जीवन खंजन Sur nar muni jan jivan khanjan वे आँखें देवों, मनुष्यों और मुनियों का जीवन हैं, खंजन-पक्षी जैसी हैं।
अंतरा मन रंजन पखियां Man ranjan pakhiyaan वे नन्हे पक्षी मन को आनंदित करते हैं।
अंतरा कृपा कटाछ लछन छबि आछे Kripa kataachh lachhan chhabi aachhe उनकी कृपा-भरी तिरछी चितवन, लक्षण और छवि सुंदर हैं।
अंतरा मृगछौना छकियां Mrigchhaunaa chhakiyaan वे हिरण के बच्चों को भी चकित करती हैं।

शब्दार्थ

अखियां आँखें हैं। खंजन चंचल गति वाला एक पक्षी है, जिसकी उपमा चितवन से दी जाती है। मन रंजन मन को आनंदित करना है। कटाछ तिरछी चितवन है; लछन और छबि में रूप के लक्षण और सुंदरता का भाव है। मृगछौना हिरण का बच्चा है।

Help us improve this page

Submit new content, corrections and improvement suggestions.

Page: /hi/hindustani/compositions/purvi-rangili-ram-ki-akhiyaan