बस किनो बाट चलत जिया पिया मोरा
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | बस किनो बाट चलत जिया पिया मोरा | Bas kino baat chalat jiya piya mora | राह चलते मेरे प्रिय ने मेरा हृदय वश में कर लिया। |
| स्थायी | बस किनो मोरि आली सुघर पियाने | Bas kino mori aali sughar piyaane | मेरी सखी, सुघड़ प्रिय ने मुझे वश में कर लिया। |
| स्थायी | कछु जादु किनो बाट चलत जिया पिया मोरा | Kachhu jaadu kino baat chalat jiya piya mora | राह चलते मेरे प्रिय ने हृदय पर कुछ जादू कर दिया। |
| अंतरा | ऐसो टोना किनो मोहे सुध बिसराई | Aiso tona kino mohe sudh bisaraai | ऐसा टोना किया कि मैं अपनी सुध भूल गई। |
| अंतरा | बाट घाट मन हर लिनो | Baat ghaat man har lino | बाट और घाट पर मेरा मन हर लिया गया। |
| अंतरा | बाट चलत जिया पिया मोरा | Baat chalat jiya piya mora | राह चलते, मेरा हृदय, मेरे प्रिय। |
शब्दार्थ
बस किनो किसी के वश में हो जाने का भाव है। जादु और टोना आकर्षण को सम्मोहन का रूप देते हैं, जबकि सुध बिसराई अपनी चेत भूल जाने को कहता है। बाट घाट मिलन के स्थान को रास्तों और घाटों तक फैलाता है।