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आहत अनहत भेद नाद के

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग यमन
विधा लक्षण गीत
ताल तीनताल · 16 मात्राएँ
लय मध्य

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी आहत अनहत भेद नाद के Aahat anahat bhed naad ke नाद के दो भेद हैं: आहत और अनाहत।
स्थायी प्रथम भेद श्रुतियन सों होवे Pratham bhed shrutiyan son hove पहला भेद सुनने से अनुभव होता है।
स्थायी अनहत मुनिजन ध्यान धरत जब Anahat munijan dhyaan dharat jab अनाहत नाद मुनियों के ध्यान में अनुभव होता है।
अंतरा नाभि कंठ और मूर्धस्थान सों Naabhi kanth aur murdhasthaan son नाभि, कंठ और सिर के स्थान से,
अंतरा मंद्र मध्य और तार होवत Mandra madhya aur taar hovat मंद्र, मध्य और तार स्वर-स्थान उत्पन्न होते हैं।
अंतरा सत सुरन के नाम बखाने Sat suran ke naam bakhaane सात स्वरों के नाम बताए गए हैं।

शब्दार्थ

आहत आघात से उत्पन्न ध्वनि है और अनहत ध्यान से जुड़े अनाहत नाद का बोध कराता है। मंद्र, मध्य और तार क्रमशः नीचे, बीच और ऊँचे स्वर-स्थान हैं। नाभि, कंठ और मूर्धस्थान इन स्वर-स्थानों को शरीर के केंद्रों से जोड़ते हैं।

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