मेरा मन बांध लीनो रे
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | मेरा मन बांध लीनो रे | Mera man baandh lino re | मेरा मन बाँध लिया गया है। |
| स्थायी | हां रे इन जोगीया के साथ | Haan re in jogiya ke saath | हाँ रे, इन जोगी के साथ। |
| अंतरा | सदारंग करम करो क्यूं ना | Sadarang karam karo kyun na | सदारंग, करुणा क्यों नहीं करते? |
| अंतरा | इन प्राननाथ के हाथ | In Prannath ke haath | इन प्राणप्रिय के हाथों में। |
शब्दार्थ
बांध लीनो मन के बँध जाने या वश में हो जाने का भाव है। करम दया या कृपा की पुकार है और प्राननाथ जीवन के समान प्रिय का संबोधन है। अंतिम पद में वक्ता स्वयं को उन्हीं प्रिय के हाथों में रखता है।