पिया की नजरिया जादु भरी
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | पिया की नजरिया जादु भरी | Piya ki najariya jaadu bhari | प्रिय की नज़र जादू से भरी है। |
| स्थायी | मोह लियो मन प्रेम भरी | Moh liyo man prem bhari | प्रेम से भरी उस नज़र ने मेरा मन मोह लिया है। |
| अंतरा | कवन जतन अब करिये आली | Kavan jatan ab kariye aali | सखी, अब मैं कौन-सा उपाय करूँ? |
| अंतरा | नाहिं परे मोहे चैन एक घरि | Naahin pare mohe chain ek ghari | मुझे एक घड़ी भी चैन नहीं मिलता। |
शब्दार्थ
नजरिया नज़र का स्नेहभरा रूप है और जादु भरी उसके मोहक प्रभाव को कहता है। आली निकट सखी का संबोधन है। घरि थोड़े समय का बोध कराता है और उसके बिना चैन न मिलने की व्याकुलता बढ़ाता है।