राधिका रमण गिरधरन गोपीनाथ
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | राधिका रमण गिरधरन गोपीनाथ | Radhika raman Giridharan Gopinath | राधिका के प्रिय, पर्वत उठाने वाले, गोपियों के नाथ, |
| स्थायी | मदन मोहन कृष्ण नटबर बिहारी | Madan Mohan Krishna Natbar Bihari | मदन मोहन कृष्ण, नृत्य और विहार में रमने वाले नटवर, |
| अंतरा | रास लीला रसिक ब्रिज जुवति प्रानपति | Raas lila rasik Brij juvati praanpati | रास-लीला के रसिक, ब्रज की युवतियों को प्राणों जैसे प्रिय, |
| अंतरा | सकल दुख हरन गोगण नचारी | Sakal dukh haran gogan nachaari | सब दुखों को हरने वाले; ‘गोगण नचारी’। |
शब्दार्थ
राधिका रमण राधिका के प्रिय हैं और गोपीनाथ गोपियों के स्वामी हैं। नटबर श्रेष्ठ नर्तक का भाव देता है और रास-लीला कृष्ण के गोपियों संग नृत्य का बोध कराती है। प्रानपति प्राणों जैसे प्रिय का संबोधन है। गोगण गायों के समूह को कहते हैं।