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राधिका रमण गिरधरन गोपीनाथ

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग अहीर भैरव
विधा ख़याल
ताल झपताल · 10 मात्राएँ
लय मध्य

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी राधिका रमण गिरधरन गोपीनाथ Radhika raman Giridharan Gopinath राधिका के प्रिय, पर्वत उठाने वाले, गोपियों के नाथ,
स्थायी मदन मोहन कृष्ण नटबर बिहारी Madan Mohan Krishna Natbar Bihari मदन मोहन कृष्ण, नृत्य और विहार में रमने वाले नटवर,
अंतरा रास लीला रसिक ब्रिज जुवति प्रानपति Raas lila rasik Brij juvati praanpati रास-लीला के रसिक, ब्रज की युवतियों को प्राणों जैसे प्रिय,
अंतरा सकल दुख हरन गोगण नचारी Sakal dukh haran gogan nachaari सब दुखों को हरने वाले; ‘गोगण नचारी’।

शब्दार्थ

राधिका रमण राधिका के प्रिय हैं और गोपीनाथ गोपियों के स्वामी हैं। नटबर श्रेष्ठ नर्तक का भाव देता है और रास-लीला कृष्ण के गोपियों संग नृत्य का बोध कराती है। प्रानपति प्राणों जैसे प्रिय का संबोधन है। गोगण गायों के समूह को कहते हैं।

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