रसिया म्हारा अमला रा राता माता
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | रसिया म्हारा अमला रा राता माता | Rasiya mhaara amala ra raata maata | मेरे रसिया, नशे में डूबे और मदमस्त। |
| स्थायी | आजो जी | Aajo ji | आइए जी। |
| अंतरा | दासी थांरी मैं जनम जनम री | Daasi thaanri main janam janam ri | मैं जन्म-जन्म की तुम्हारी दासी हूँ। |
| अंतरा | म्हाने नित चाहो जी | Mhaane nit chaaho ji | मुझे नित्य प्रेम कीजिए। |
शब्दार्थ
म्हारा, थांरी और म्हाने मेरे, तुम्हारी और मुझे के क्षेत्रीय रूप हैं। जनम जनम समर्पण को बार-बार के जन्मों तक फैलाता है। आदरसूचक जी आने और सदा प्रेम करने की विनती को कोमल बनाता है।