ये नरहर नारायन गोपाल गिरिधर
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | ये नरहर नारायन गोपाल गिरिधर | Ye Narahar Narayan Gopal Giridhar | ये नरहर, नारायन, गोपाल और गिरिधर हैं। |
| अंतरा | गोपिपति घनश्याम | Gopipati Ghanshyam | गोपियों के स्वामी, मेघ के समान श्यामवर्ण। |
| अंतरा | कमलनयन बनवारि | Kamalnayan Banwari | कमलनयन बनवारी। |
| अंतरा | गरुड़ध्वज चतुरभूज मनोहर | Garudadhwaj Chaturbhuj Manohar | गरुड़ के ध्वज वाले, चार भुजाओं वाले मनोहर। |
शब्दार्थ
नरहर, नारायन, गोपाल और गिरिधर भगवान के नाम हैं। गोपिपति गोपियों के स्वामी को कहता है और कमलनयन में आँखों की तुलना कमल से है। गरुड़ध्वज में ध्वज पर गरुड़ का चिह्न है और चतुरभूज चार भुजाओं का वर्णन करता है।