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जागो मेरे भाग आज

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग काफ़ी
विधा ध्रुपद
ताल चौताल · 12 मात्राएँ
लय विलंबित

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी जागो मेरे भाग आज Jaago mere bhaag aaj मेरे भाग्य, आज जागो!
स्थायी श्याम सुंदर कमलनयन Shyam sundar Kamalnayan सुंदर श्याम, कमलनयन,
स्थायी आन ठाड़े मेरे द्वार Aan thaare mere dvaar आकर मेरे द्वार पर खड़े हैं।
अंतरा तन मन धन नौछावर Tan man dhan nauchhaavar तन, मन और धन सब न्योछावर हैं।
अंतरा करिहों मैं परिहों पैंयां Karihon main parihon painyaan मैं अर्पित करूँगी और उनके पैरों पड़ूँगी।
अंतरा लैहों बलैयां आज बार बार Laihon balaiyaan aaj baar baar आज बार-बार बलैयाँ लूँगी।

शब्दार्थ

नौछावर में स्नेह या भक्ति से सब कुछ अर्पित करने का भाव है। पैंयां पैरों को कहता है। बलैयां लेना प्रिय को अनिष्ट से बचाने के लिए किया जाने वाला स्नेहपूर्ण संकेत है।

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