नमन करूं मैं सद्गुरु चरणा
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | नमन करूं मैं सद्गुरु चरणा | Naman karun main sadguru charana | मैं सद्गुरु के चरणों में नमन करता हूँ। |
| स्थायी | सब दुख हरणा भव निस्तरणा | Sab dukh harana bhav nistarana | वे सब दुख हरते हैं और संसार से पार उतारते हैं। |
| अंतरा | शुद्ध भाव धर अंतःकरणा | Shuddh bhaav dhar antahkarana | अपने अंतःकरण में शुद्ध भाव रख। |
| अंतरा | सुर नर किन्नर वंदित चरणा | Sur nar kinnar vandit charana | उन चरणों की वंदना देवता, मनुष्य और किन्नर करते हैं। |
शब्दार्थ
सद्गुरु सच्चे आध्यात्मिक गुरु हैं और चरणा आदर तथा शरण के स्थान के रूप में उनके चरणों को कहता है। भव निस्तरणा संसार से मुक्ति को पार उतरने के बिंब में व्यक्त करता है। अंतःकरण मन का भीतरी भाव-जगत है, जिसमें शुद्ध भाव रखने को कहा गया है।