Beta (under development)

पनघट मुरलिया बाजे सखी

गीत-पाठ और भावार्थ।

इस रचना का परिचय

विवरण जानकारी
राग खमाज
विधा ख़याल
ताल तीनताल · 16 मात्राएँ

पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ

अंग गीत-पाठ रोमन लिप्यंतरण भावार्थ
स्थायी पनघट मुरलिया बाजे सखी Panaghat muraliya baaje sakhi सखी, पनघट पर मुरली बज रही है।
स्थायी सिमिट जुवति जन ठाड़े निचेतन Simit juvati jan thaare nichetan युवतियाँ सिमटकर खड़ी हैं, अपनी सुध-बुध खो बैठी हैं।
स्थायी पुलकित सब तन मुकुलित नयन Pulakit sab tan mukulit nayan उनके सारे शरीर पुलकित हैं और नयन धीरे से मुँद रहे हैं।
अंतरा राग खमाज सुनाय सुलच्छन Raag Khamaj sunaay sulachchhan मुरली से सुंदर राग खमाज सुनाई दे रहा है।
अंतरा पुलकित सब तन मुकुलित नयन Pulakit sab tan mukulit nayan उनके सारे शरीर पुलकित हैं और नयन धीरे से मुँद रहे हैं।

शब्दार्थ

पनघट पानी भरने का स्थान है और मुरलिया बाँसुरी का स्नेहभरा रूप है। सिमिट में पास-पास एकत्र होने का भाव है, जबकि निचेतन संगीत में सुध-बुध खोने को कहता है। पुलकित शरीर के रोमांच को और मुकुलित कलियों की तरह मुँदते नयनों को व्यक्त करता है।

Help us improve this page

Submit new content, corrections and improvement suggestions.

Page: /hi/hindustani/compositions/khamaj-panaghat-muraliya-baaje-sakhi