सांवल मोहना मैं तेंडे रें कुरबान
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | सांवल मोहना मैं तेंडे रें कुरबान | Saanval Mohana main tende ren kurbaan | सांवले मोहना, मैं तुम पर कुर्बान हूँ। |
| अंतरा | बिन वेखं सानु कल ना पउंदी | Bin vekhan saanu kal na paundi | तुम्हें देखे बिना मुझे चैन नहीं मिलता। |
| अंतरा | तूं मेंडे ही प्रान सांवल | Tun mende hi praan Saanval | सांवले, तुम ही मेरे प्राण हो। |
शब्दार्थ
कुरबान में प्रेम या भक्ति से अपने को अर्पित करने का भाव है। वेखं देखने को कहता है और कल यहाँ चैन या आराम का बोध देता है। प्रान जीवन-श्वास तथा जीवन के समान प्रिय व्यक्ति को कहता है।