सखि मेरो मन लीनो सलोने सजना
गीत-पाठ और भावार्थ।
इस रचना का परिचय
पूरा गीत-पाठ, लिप्यंतरण और भावार्थ
| अंग | गीत-पाठ | रोमन लिप्यंतरण | भावार्थ |
|---|---|---|---|
| स्थायी | सखि मेरो मन लीनो सलोने सजना | Sakhi mero man lino salone sajana | सखी, मेरे सलोने प्रिय ने मेरा मन ले लिया है। |
| अंतरा | सांवरि सूरत रस भरि मूरत | Saanvari surat ras bhari murat | वह साँवली सूरत, वह रस से भरी मूरत। |
| अंतरा | सांवरि सूरत सांवरि सूरत रस भरि मूरत | Saanvari surat saanvari surat ras bhari murat | वह साँवली सूरत, वह साँवली सूरत, वह रस से भरी मूरत। |
| अंतरा | बंसी बट जमुना सखि मेरो मन लीनो सलोने सजना | Bansi bat Jamuna sakhi mero man lino salone sajana | जमुना के बंसीबट पर, सखी, मेरे सलोने प्रिय ने मेरा मन ले लिया है। |
शब्दार्थ
सखि निकट सखी का संबोधन है और सलोने सजना सुंदर प्रिय का स्नेहभरा नाम है। सांवरि सूरत में साँवले सुंदर मुख का और रस भरि मूरत में माधुर्य से भरे रूप का भाव है। बार-बार कही गई सूरत की बात प्रिय के रूप पर ठहरने का अनुभव देती है। बंसीबट जमुना किनारे का वह वृक्ष-स्थल है जो मुरली बजाने वाले प्रिय से जुड़ा है।